Sunday, February 26, 2012

मेरी पसंद का मौसम....

मुझे तो सारे मौसम पसंद आते हैं
क्‍योंकि‍
हर मौसम का अपना अहसास
अपना अंदाज
और अपनी खासि‍यत होती है
जैसे हर इंसान की अपनी
रवायत होती है ....
जो एक में होता है
वो दूजे में नहीं...
दूजे सा कभी
तीसरे में नहीं होता.....
इंसान,
कोई पारि‍जात सा होता है
कोई गुलाब सा
और कोई
मरूस्‍थल थार सा....
जैसे
हर इंसान एक नहीं होता
वैसे ही
सारे मौस‍म एक नहीं होते
पर
मैं कह सकती हूं कि
मुझे सारे मौसम पसंद आते हैं
मगर ये कैसे कह दूं
कि‍ मुझे तो
पारि‍जात....गुलाब...थार
और रुद्राक्ष भी पसंद आते हैं......... ????

10 comments:

अरूण साथी said...

ऽ कह दिजिए, मौसम की तरह ही सब पसंद है सुन्दर अभिव्यक्ति।


एक यथार्थ, मन की बोली---

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही बढ़िया।

सादर

Samit Kumar Pathak said...

Excellent

Pallavi said...

सुंदर अभिव्यक्ति.....

Atul Shrivastava said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत श्रेष्ठ और सटीक!

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!!

avanti singh said...

बहुत ही बढ़िया

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर...

Karuna Saxena said...

बहुत सुन्दर रचना है....
बधाईयाँ...